एक सफ़ेद चादर और उस पे चटकीले अबीर, ये कुछ वही एहसास है एक ढीठ, चंचल, अल्लहर लड़की सी...
अगर वो खुद भी ना कहती, तो भी मुझे एहसास है उसके अंदर की चंचलता, शोखिपन और उसकी चपलता का, एक अल्ल्हर्पण है, उसमे जो आपको अंदर तक उद्दवेलित कर दे! एक नौजवान ढीठ नदी सी लड़की है वो,
जब वो साथ ना हो तो मन घूम फिर कर उसी के पास आना चाहता है, उसी से बात करने का जी करता है, बस उसी के रूबरू ....... पता नहीं वो एक साथी है भी या नहीं, पर इस सफ़ेद चादर पे लिपटी हुए अबीर सी है वो! एक नौजवान ढीठ नदी सी लड़की है वो,
वो मनमौजी है, हो भी क्यों नहीं, वह आपसे बात करना चाहती है, बात करती है, उसकी बातो मे गर्माहट हैं. कल कल करती हुई वह बात-बेबात हँसती रहती है... वह और हँसती चली जाती है, सुबह का उजास और शाम की सुरमई चमक के साथ,
पर जब आप उसे अनुराग बस जब छूना चाहते हैं..और वो चली जाती है बलखाती,इठलाती-इतराती, इस तरह उसका अनायास जाना भी अनायास नहीं है! आप कवि हों, ना हों, वो आपमें जीवन के प्रति राग पैदा करती है.
कल भी ये मन उस अबीर के चटकीले रंगों को देखना चाहेगा,उसके बातो की गर्माहट महसूस करना चाहेगा और और उस नौजवान ढीठ नदी सी लड़की को ढूंढेगा........क्यूकि वो पल अनायास नहीं हो सकते है .....................
Thursday, April 22, 2010
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Please give credit to my blog post...Nadi ek Naujvan Deeth Ladki hai..Thank u Kushagra!
ReplyDeletesir jiii
ReplyDeletebahut achhchhhaa likh rahe hai....
ab mai v hindi me koshish karunga...
Satish
लेखक की मनोस्थिति और इक अल्हड सी लड़की का का नदी-पना . क्या खूब अभिव्यक्त किया है आपने
ReplyDeleteमेरी इस अभिवियक्ति मे अर्बिन्दजी की शैली का सीधा असर है. इस के लिए मै उनका अभार वयक्त करता हू.
ReplyDeleteस्वागतम् !! ब्लॉग जगत् में आगमन और देवनागरी में लेखन हेतु भी। जरा सा क्रेडिट तो मेरा भी बनता है, महोदय!! बोलिए, सही कहा ना !!
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ReplyDeletereally a marvelous writting, giving a touchy feeling... great sir..
ReplyDeletePankaj